Friday, 2 August 2024

मैं क्यों प्यार किया करता हूँ।

 मैं क्यों प्यार किया करता हूँ।


मैं क्यों प्यार किया करता हूँ! सर्वस देकर मौन रुदन का क्यों व्यापार किया करता हूँ ?


भूल सकूँ जग की दुर्घातें उसकी स्मृति में खोकर ही, जीवन का कल्मष धो डालूँ अपने नयनों से रोकर ही, इसीलिए तो उर-अरमानों को मैं छार किया करता हूँ। मैं क्यों प्यार किया करता हूँ !


कहता जग पागल मुझसे पर पागलपन मेरा मधु प्याला, अनु-धार है मेरी मदिरा उर-ज्वाला मेरी मधुशाला, इससे जग की मधुशाला का मैं परिहार किया करता हूँ। मैं क्यों प्यार किया करता हूँ !


करले जग मुझसे मन की पर मैं अपनेपन में दीवाना, चिंता करता नहीं दुःखों की मैं जलने वाला परवाना, अरे ! इसी से सारपूर्ण-जीवन निस्सार किया करता हूँ। मैं क्यों प्यार किया करता हूँ!


उसके बंधन में बंधकर ही दो क्षण जीवन का सुख पालूँ, और न उच्छृंखल हो पाऊँ मानस-सागर को मथ डालूँ, इसीलिए तो प्रणय-बंधनों का सत्कार किया करता हूँ! मैं क्यों प्यार किया करता हूँ !

Tuesday, 7 June 2016

ओ.बी.सी. एकता को तोड़ने की रणनीति है 
यादवोंं का अपराधीकरण

आज जब यूपी चुनाव सर पे है तो ऐसे माहौल में ब्राह्मणवादी मीडिया के द्वारा यादवों को अपराधी बनाने की गति काफी तेज कर दी गई है| कहना न होगा कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती| ऐसे में समाज के सबसे संवेदनशील माध्यम और उसे संचालित करने वाले विद्वानों (जो कि दिन-रात अपनी बौद्धिकता साबित करने में लगे रहते हैं) के द्वारा यादवों के प्रति जो नफ़रत फैलाई जा रही है। यह कोई संयोग मात्र नहीं है| जहाँ तक मुझे याद है। इससे पहले बिहार में नीतीशजी के नेतृत्व के नाम पर यादवों को अपराधी बता कर ओ. बी. सी. समाज की एकता को सफलतापूर्वक तोड़ा जा चुका है| आज यूपी चुनाव से ठीक पहले ये ब्राह्मणवादी लोग पुनः वही चाल दुहरा रहे हैं| यूपी में केशव मौर्या को चुनावी कमान सौपना और अपराधी के रूप में यादवों को चिन्हित करना अपराधियों को बेनकाब करने भर की मंशा मात्र नहीं है| ये चुनावी सतरंज की पुराणी चालें हैं, जिसके समाजशास्त्र को अब समाज को समझना होगा और जमीनी स्तर पर जाकर इनका विरोध करना होगा|
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अगर इसके दायरे को थोड़ा विस्तृत कर दें तो पता चलेगा की इस तरह की रणनीति हर राज्य के चुनाव से पहले अपनाई जा चुकी है। जहाँ जो जाति चुनावी राजनीति में एक सफल दावेदार रही है वहां उस जाति को आपराधिक प्रक्रिया से जोड़ कर अन्य जातियों के दिलों में उनके प्रति नफ़रत फैलाई गई है और इसका परिणाम ब्राह्मणवादियों के पक्ष में रहा है|

मित्रों, ये वही सोच और विचार है जिसके तहत इस देश में कुर्सी पाने के लिए मुसलमानों को आतंकवादी कहकर उसके प्रति नफ़रत का बीज बोया गया था| आज मुसलमानों के प्रति पुरे देश में नफ़रत का जो आलम है। हम सभी उससे भली भांति परिचित हैं और उस नफ़रत को महसूस भी करते हैं| ये ब्राह्मणवादी लोग सिर्फ ब्रह्मणवाद से ही प्रेम करते हैं और इसे बचाने एवं मजबूत करने के लिए ही सत्ता भी हथियाना चाहते हैं| इनकी सत्ता को जहाँ से भी चुनौती मिले ये उनके खिलाफ़ काफी आक्रामक रूख अपनाते हैं| आज देश भर में प्रगतिशील आन्दोलनों का दमन और उनके नेताओं तथा चिंतकों की हत्या एवं तमाम विश्वविद्यालयों और उनके छात्रों के उपर हमला ब्रह्मणवाद को चुनौती देने का ही परिणाम है|                                   
                                                     फोटो : फेसबुक से